पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर त्रिशताब्दी वर्ष
श्रृंखला= 62 अहिल्यादेवी और तुकोजीराव भाग दो
अहिल्यादेवी की विशिष्ट कार्यपद्धति थी। वे किसी को भी रुपये चुकाने में देर करती थी किन्तु वे किसान, बाहर के छोटे-व्यापारियों आदि को मुआवजा देने में तत्पर रहती थी। किसी भी बड़े व्यक्ति को भी रुपये चुकाने में इसलिए देर करती थी क्योंकि लोगों को ऐसा नहीं लगे कि उनके पास बहुत अधिक रकम हैं। लोकमाता किसी भी बकाया रकम को तब चुकाती थी जब तक उन्हें यह ना लगे कि “बात अब बिगड़ सकती हैं”।
जैसे ही अहिल्यामाता को आभास होता कि बात अब बिगड़ सकती हैं तो वे तत्परता दिखाते हुए तुरंत बकाया चुका देती थी।
एक बार अचानक ही पुणे सरकार से माधवराव पेशवा का महेश्वर में पत्र आ गया। पत्र में अहिल्यादेवी होलकर से बकाया चुकाने की बात कही थी। सरदेशमुखी से होने वाली आय, अंतस्थ पोतदारी, सूबेदारी जागीर, गंगाधर यशवंत दीवान की रकम आदि को मिलाकर 11,56,605 रुपये बकाया थी। अहिल्यादेवी ने पहले ही 5,50,000 रुपये चुका दिए थे। बाद में 6,06,605 रुपये चुकाना शेष था। अहिल्यादेवी ने रकम चुकाने में फिर देरी की क्योंकि वे जानती थी कि पेशवा धन के लिए होलकर और शिंदे पर अधिक निर्भर हैं। महेश्वर में दरबार लगा, प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने काम के ब्योरे लेकर के लोकमाता अहिल्यादेवी को अवगत करवा रहे थे। अहिल्यादेवी पेशवा की रकम को चुकाने की योजना बना रही थी। उन्होंने सबको सूचना देते हुए कहां :-
“सभी कमाविसदारों को पत्र लिखकर सूचित किया जाए कि उन्हें कितनी रकम पुणे सरकार के पास जमा करवानी हैं”।
यह सारी बातें चल ही रही थी कि दीवान ने कमाविसदारों के परगने की जानकारी निकाली और अनुमान लगाने लगे की किस परगने से कितनी रकम पुणे सरकार में जमा हो सकती हैं। दरबार में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के काम पर अहिल्यादेवी की नजर थी। दीवान पुणे सरकार को भेजे जाने वाली परगने की रकम तय करने लगा। अहिल्यादेवी ने आदेश देते हुए कहां :-
“मांडवगण, सुलतानपुर, आंबाड़ और सेवगांव परगने के प्रत्येक कमाविसदार से 10,000 रुपये पुणे सरकार को चुकाए।”
यह भी तय हुआ की चाँदवाड़ के कमाविसदार दिनकर अनंत 60,000 रुपये पेशवा सरकार के पास भेजेंगे । थालनेर, कोरहाले और देवपुर के प्रत्येक को 5,000 रुपये पेशवा सरकार में भेजने के आदेश दिए गए। अहिल्यादेवी ने दरबार की बैठक में सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए तय किया कि पेशवा सरकार को बकाया कैसे चुकाया जाए। दरबार में पेशवा सरकार को रुपये चुकाने की चर्चा चल ही रही थी कि नथो बालाजी ने सूचना दी कि बिजागढ़ में तुकोजी ने पौन लाख की ‘वरात’ निकालकर पुणे सरकार का बकाया चुका दिया हैं।
अहिल्यादेवी तीन घंटे से दरबार में फड़णीस (राज्य के वित्त मंत्री) एवं अन्य अधिकारियों के साथ पुणे सरकार को रुपये चुकाने की योजना बना रही थी और इधर तुकोजी ने अहिल्यादेवी की आज्ञा के बिना ही फैसला करके पुणे सरकार को बकाया चुका दिया। तुकोजी का व्यवहार सीधा नहीं था और वे जरूरत से ज्यादा ही आर्थिक मामलों में दखल दे रहे थे। अहिल्यादेवी समझ गई कि तुकोजी कुछ अधिक ही आगे बढ़ गए हैं। उन्होंने सोचा तुकोजी को समझाना होगा और यह व्यवहार दोबारा नहीं हो इसलिए उन्हें दबाकर भी रखना होगा। अहिल्यादेवी ने तुकोजी को तुरंत पत्र लिखा जो इस प्रकार हैं :-
“सरकार से हुए करार के अनुसार वह रकम महेश्वर लाकर फिर सरकार को हिस्सा दिया जाना चाहिए लेकिन आपने तो इससे संबंधित फैसला स्वयं ही कर लिया।” निरंतर—-
संदर्भ - बहुआयामी व्यक्तित्व अहिल्यादेवी भाग एक
लेखिका - आयुषी जैन
प्रकाशक - अर्चना प्रकाशन भोपाल
संकलन- स्वयंसेवक एवं टीम
प्रस्तुति ....अशोक जी पोरवाल
🙏🕉️हर हर महादेव🕉️🙏

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